૬. कुछ शब्द : कविता पांडेय

कुछ शब्द शादी होते ही बट गए।

कुछ शब्द घूंघट में ही छूपे रह गए।

कुछ शब्द सबको समझने मे ही खर्च हो गए।

कुछ शब्द रसोई तक ही सीमित रह गए।

कुछ शब्द घर की चार दीवारों में ही बंद रह गए।

कुछ शब्द मर्यादाओं का ही पालन करते रह गए।

कुछ शब्द उनके टोकने पर सहम गए।

कुछ शब्द बच्चो तक ही रह गए।

कुछ शब्द जिम्मेदारियो में ही अशक्त हो गए।

कुछ शब्द सबको निभाने मे ही बीक गए। 

कुछ शब्द मेरे औरत होने पर ही खत्म हो गए।

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